योग परंपरा में पूरक (सांस भीतर लेना), रेचक (सांस बाहर छोड़ना) और कुम्भक (श्वास को रोकना) जैसे शब्द मिलते हैं। श्वास रोकना सभी के लिए उपयुक्त नहीं और इसे फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने का निश्चित उपाय नहीं समझना चाहिए।
शब्दों का अर्थ
पूरक का अर्थ सांस भीतर लेना, रेचक का अर्थ सांस बाहर छोड़ना और कुम्भक का अर्थ सांस को रोकना है। अलग-अलग परंपराओं में अभ्यास के नियम और अनुपात अलग हो सकते हैं।
शुरुआत कैसे करें
नए साधक पहले आरामदायक, स्वाभाविक श्वास और सहज लंबा श्वास छोड़ने पर ध्यान दें। सांस रोकने या तय अनुपात अपनाने की कोशिश बिना योग्य शिक्षक की देखरेख न करें।
किन्हें विशेष सावधानी चाहिए
हृदय या फेफड़ों की बीमारी, अनियंत्रित हाई BP, गर्भावस्था, चक्कर आने या पैनिक की प्रवृत्ति होने पर breath retention से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
सांस फूलना कब गंभीर है
नई या बढ़ती सांस की तकलीफ को केवल कमजोर फेफड़ों का संकेत न मानें। जरूरत पड़ने पर चिकित्सा मूल्यांकन कराएँ।
लेखक: Mukesh, Ashtangaa Yoga with Mukesh. योगाभ्यास अपनी क्षमता और योग्य मार्गदर्शन के अनुसार करें।
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